Inspiring 8 Quotes of Harivansh Rai Bachchan in Hindi.

August 1, 2020 By Poonam Kushwaha
Harivansh Rai Bachchan

When it comes to Harivansh Rai Bachchan, the mind always crave for more.

एक बरस में एक बार ही जलती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला;
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मानती मधुशाला.

मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ,
मैं मादकता निःशेष लिए फिरता हूँ,
जिसको सुनकर जग झूमे, झुके, लहराए ,
मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ. ― Harivansh Rai Bachchan

जो बीत गयी सो बात गयी,
जीवन एक सितारा था,
माना वह बेहद प्यारा था,
वह डूब गया तो डूब गया,
अम्बर के आनन् को देखो.
कितने इसके तारे टूटे,
कितने इसके प्यारे छूटे,
जो छुट गए फिर कहा मिले,
पर बोले टूटे तारों पर,
कब अम्बर शोक मनाता हैं
जो बीत गयी सो बात गयी

धर्म-ग्रंथ सब जला चुकी है जिसके अन्तर की ज्वाला, मंदिर, मस्जिद, गिरजे—सबको तोड़ चुका जो मतवाला, पंडित, मोमिन, पादरियों के फंदों को जो काट चुका कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला ― Harivansh Rai Bachchan

बजी नफ़ीरी और नमाज़ी भूल गया अल्लाताला, गाज़ गिरी, पर ध्यान सुरा में मग्न रहा पीनेवाला; शेख, बुरा मत मानो इसको, साफ़ कहूँ तो मस्जिद को अभी युगों तक सिखलाएगी ध्यान लगाना मधुशाला

चलने ही चलने में कितना जीवन, हाय, बिता डाला ! ‘दूर अभी है’, पर, कहता है हर पथ बतलाने वाला; हिम्मत है न बढूँ आगे को साहस है न—फिरूँ पीछे; किंकर्तव्यविमूढ़ मुझे कर दूर खड़ी है मधुशाला ― Harivansh Rai Bachchan

Baith jata hu mitti pe aksar,
Kyonki mujhe apni aukat achi lagti hai.

धीर सुतों के हृदय-रक्त की आज बना रक्तिम हाला, वीर सुतों के वर शीशों का हाथों में लेकर प्याला, अति उदार दानी साक़ी है आज बनी भारतमाता, स्वतंत्रता है तृषित कालिका, बलिवेदी है मधुशाला ― Harivansh Rai Bachchan

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